कोरोना की यह रफ्तार डरा रही
- शहर में आश्चर्यजनक गति से बढ़ रहे हैं कोरोना के मामले
- प्राइवेट अस्पतालों में एक बेड के लिए गिड़गिड़ा रहे हैं लोग
- एसएन के 80 बेड भी फुल, आज से एक नया वार्ड शुरू होगा
- कई निजी अस्पतालों ने कोविड इलाज की अनुमति मांगी है
कोरोना के केस आश्चर्यजनक गति से बढ़ रहे हैं। एसएन मेडिकल कॉलेज में 80 बेड का कोविड वार्ड फुल हो गया है। आज एक अन्य वार्ड को कोविड मरीजों के लिए तैयार किया जा रहा है। प्राइवेट कोविड अस्पतालों में जगह नहीं है। लोग गिड़गिड़ा रहे हैं कि किसी तरह से उन्हें बेड मिल जाए। कई अन्य अस्पतालों ने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर कोविड अस्पताल शुरू करने की अनुमति मांगी है।
प्राइवेट स्तर पर शहर में लेबल वन अस्पतालों की कमी सामने आ रही है। लेबल वन अस्पताल उन अस्पतालों को कहते हैं, जहां वेंटीलेटर की सुविधा उपलब्ध हो। अकेले एसएन मेडिकल कॉलेज में 150 वेंटीलेटर की सुविधा उपलब्ध है। कोविड का इलाज कर रहे रवि अस्पताल में वेंटीलेटर की सुविधा नहीं है। यही कारण है इस अस्पताल को लेबल टू का दर्जा है। मरीजों के संक्रमित होने की रफ्तार को देखकर कोविड का इलाज करने वाले चिकित्सक भी हैरान हैं। रवि हॉस्पीटल में लेबल टू के मरीजों का इलाज कर रहे क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ डॉ. रनवीर त्यागी ने बताया कि पिछले साल की तुलना में यह लहर बहुत तेज है।
रविवार को रवि अस्पताल ने एक अन्य वार्ड में 7-8 मरीजों के लिए बेड की व्यवस्था कर लेबल टू के मरीजों के लिए तैयार किया। सिर्फ दो घंटे में आठ बेड फुल हो गए। बता दें कि लेबल टू के मरीजों को केवल हाई प्रेशर ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। इन मरीजों को वेंटीलेटर की जरूरत नहीं पड़ती। डॉ. त्यागी का कहना है कि पिछले वर्ष कोरोना की लहर में जो मरीज अस्पताल आ रहे थे, उनकी हालत इतनी खराब नहीं थी, जितनी इस वर्ष नजर आ रही है। ऐसे मरीज आ रहे हैं जिनका ऑक्सीजन का स्तर 80 तथा फेंफड़े 50 प्रतिशत संक्रमित दिखाई दे रहे हैं।
डॉ.त्यागी ने बताया कि वह आईएमए के माध्यम से सिनर्जी अस्पताल में एक कोविड वार्ड बनाने की कोशिश कर रहे हैं ताकि लोगों को लाभ मिल सके। कई अन्य चिकित्सकों ने भी अपने अस्पताल में कोविड वार्ड खोलने के प्रयास शुरू कर दिए हैं।
कोरोना के संक्रमण की रफ्तार इतनी तेज है कि कई इलाकों में पूरे-पूरे परिवार कोरोना से ग्रसित हो गए हैं। इन लोगों की गिनती प्रशासन द्वारा दिए गए आंकड़ों में नहीं है। ऐसे परिवार केवल एंटीजन टेस्ट कराकर होम आइसोलेशन में रहकर अपना इलाज करा रहे हैं। डॉ. त्यागी का कहना है कि जो लोग होम आइसोलेशन में हैं। वह अपने यहां ऑक्सीमीटर जरूर रखें। ऑक्सीजन का स्तर 94 से कम होने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें। साथ ही सांस रोकने पर जिन लोगों को खांसी आ रही हो अथवा सांस फूल रही हो, ऐसे लोग तुरंत चिकित्सक को दिखाकर उनकी सलाह का पालन करें।










