माफी मांगो अखिलेश!
- दलित दिवाली को लेकर ट्रोलर्स के निशाने पर पूर्व सीएम
- समाजवादी पार्टी ने 14 को आंबेडकर जंयती पर दलित दिवाली मनाने का किया है फैसला
- पूर्व सीएम ने कार्यकर्ताओं से घरों और सार्वजनिक स्थलों पर दीए जलाने की अपील की
लोकसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी मिलकर चुनाव लड़े थे। करारी हार के बाद यह गठबंधन टूट गया और दोनों दलों के बीच बड़ी दरार आ गई। अब अखिलेश यादव ने दलितों को लुभाने के लिए 14 अप्रैल को दलित दिवाली माने की बात कही है। हालांकि उनके इस आह्वान पर वह बुरी तरह से घिर गए हैं। ट्विटर पर #माफी_मांगो_अखिलेश आज टॉप ट्रेंडिंग है।
अखिलेश ने बीएसपी के कोर वोटरों में पैठ बनाने के लिए 14 अप्रैल को आंबेडकर जयंती पर दलित दिवाली मनाने का फैसला किया है। पार्टी के कार्यकर्ता और पदाधिकारी 14 अप्रैल की शाम पार्टी कार्यालय, अपने घरों, सार्वजनिक स्थल और आंबेडकर प्रतिमा स्थलों पर दीपक जलाकर उनको श्रद्धा के साथ नमन करेंगे। सपा ने इसके लिए सभी कार्यकर्ताओं को तैयार करने को कहा है। उन्होंने इस मामले में ट्वीट भी किया। उन्होंने ट्विटर पर लिखा, भाजपा के राजनीतिक अमावस्या के काल में वो संविधान खतरे में है, जिससे बाबा साहेब ने स्वतंत्र भारत को नई रोशनी दी थी। इसलिए बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती, 14 अप्रैल को समाजवादी पार्टी यूपी, देश और विदेश में दलित दिवाली मनाने का आह्वान करती है।
हालांकि इस ट्वीट पर अखिलेश घिर गए। ट्विटर पर लोगों ने माफी_मांगो_अखिलेश पर ट्वीट करना शुरू कर दिया और देखते ही देखते #माफी_मांगो_अखिलेश टॉप ट्रेंडिंग हो गया। एक यूजर ने लिखा कि कनाडा में आंबेडकर जयंती को समानता दिवस के रूप में मनाया जा रहा है और अखिलेश भारत में लोगों को बांटने की बात कर रहे हैं। लोगों ने लिखा कि आंबेडकर जी कहते थे कि हम सिर्फ भारतीय हैं और अखिलेश यादव यादव भारत के लोगों को बांटने की कोशिश कर रहे हैं। किसी ने लिखा कि इस तरह के ट्वीट से अखिलेश ने आंबेडकर को सिर्फ दलितों तक सीमित कर दिया।










