सीबीएसई 12वीं की परीक्षा कराए, भले ही जुलाई में हो
सीबीएसई द्वारा दसवीं की बोर्ड परीक्षाएं रद्द किए जाने पर परीक्षाओं की तैयारी में दिन-रात एक किए छात्र-छात्राओं में मायूसी छा गई है। वे ज्यादा परेशान हो रहे हैं जिन्होेंने अच्छे नंबर हासिल करने के लिए बहुत कड़ी मेहनत की थी। अब इन छात्रों को भय सता रहा है कि अगली कक्षा में प्रमोट करते समय उनके दसवीं के परिश्रम का किस आधार पर मूल्यांकन किया जाएगा। उधर बारहवीं के छात्र-छात्राएं चाहते हैं कि उनकी भौतिक परीक्षाएं कराई जाएं, भले ही इसके लिया कोई दूसरा तरीका अपनाया जाए।
प्रिल्यूड पब्लिक स्कूल की दसवीं की छात्रा रितिका लाल और छात्र सारांश अग्रवाल परीक्षा निरस्त होने से बहुत निराश हैं। रितिका ने कहा कि हम अपने स्वास्थ्य के लिहाज से देखें तो यह बहुत अच्छा निर्णय है, क्योंकि कोरोना काल में परीक्षा कराना बहुत रिस्की होता। व्यक्तिगत तौर पर वे इस फैसले से बहुत मायूस हुई हैं क्योंकि उन्होंने परीक्षा के लिए कड़ी मेहनत की थी। सारांश अग्रवाल और उनके परिवारीजन परीक्षा निरस्त होने की सूचना मिलने पर स्तब्ध हो गए। सारांश का कहना है कि उन्होंने परीक्षा के लिए कड़ी मेहनत की थी।
दसवीं के परीक्षार्थी निराश, बारहवीं के परीक्षा चाहते
इसी स्कूल की बारहवीं की छात्रा नंदिनी पोपटानी, मिताली अतवानी और अरुणिमा सारस्वत इस बात से परेशान हो उठी हैं कि कहीं 12वीं की परीक्षाएं भी दसवीं की तरह निरस्त न हो जाएं। ये छात्राएं चाहती हैं कि उनकी बोर्ड परीक्षाएं भौतिक ही कराई जाएं और निर्धारित समय पर ही कराई जाएं। उनका कहना है कि यह सही है कि कोरोना महामारी के कारण हालात बहुत विपरीत हैं, लेकिन परीक्षाओं को टालना समस्या का समाधान नहीं हो सकता। परीक्षाएं समय पर होनी चाहिए, बोर्ड चाहे तो इसके लिए कोई दूसरा तरीका निकाल सकता है। परीक्षाओं में देरी से छात्र-छात्राओं को दूसरे शिक्षण संस्थानों में प्रवेश लेने में दिक्कत आएंगी।

नंदिनी पोपटानी 
मिताली अतवानी 
अरुणिमा सारस्वत 
रितिका लाल 
सारांश अग्रवाल
दसवीं की परीक्षा स्थगति होने को भी अप्सा ने उचित नहीं बताया
आगरा प्रोग्रेसिव स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. सुशील गुप्ता ने सीबीएसई द्वारा दसवीं की बोर्ड परीक्षाएं रद्द किए जाने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि इससे छात्रों को परेशानी होगी। सीबीएसई प्रशासन 12वीं की परीक्षाएं जरूर कराए, भले ही जुलाई में करानी पड़ें।
डॉ. गुप्ता ने कहा कि दसवीं के छात्रों के श्रेष्ठ मूल्यांकन का पूरा प्रयास किया जाएगा। कक्षा बारह की परीक्षाएं हालात अनुकूल होने पर 15 जून से कराने का प्रस्ताव है। उन्होंने कहा कि बारहवीं की परीक्षा होनी चाहिए, भले ही जुलाई माह में करानी पड़ें। कक्षा बारह के परिणाम से भविष्य जुड़ा होता है। अगर उसमें उचित मूल्यांकन नहीं किया गया तो उच्च शिक्षा के विभिन्न संस्थानों में प्रवेश के समय छात्रों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। कोरोना महामारी के प्रसार को ध्यान में रखने के साथ- ही- साथ हमें छात्रों के भविष्य को भी ध्यान में रखना होगा। हर परीक्षा केंद्र पर छात्रों की संख्या निर्धारित कर बारहवीं कक्षा की आॅफलाइन परीक्षाएं कराई जा सकती है।
छात्र एवं अभिभावक स्वयं भी भौतिक बोर्ड परीक्षा चाहते हैं। अगर सरकार हर जिले के लिए नोडल अधिकारी और दिशा-निर्देश जारी करे और समस्त सीबीएसई के विद्यालय दृढ़ प्रतिज्ञ हो जाएं तो निश्चित रूप से परीक्षाओं को छात्रों की पूरी सुरक्षा के साथ कराया जा सकता है। ऐसा होने पर ही छात्रों का उचित मूल्यांकन भी संभव हो सकेगा और उनके अंदर प्रतिस्पर्धा की भावना भी बनी रहेगी।










