April 20, 2026
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आगरा हेल्थ इमरजेंसी की ओर

  • ऑक्सीजन की किल्लत से आईसीयू और वेंटिलेटर न मिलने तक बढ़ीं दिक्कतें
  • ताजनगरी में ऑक्सीजन की खपत कई गुना बढ़ी, कोविड अस्पताल भी बढ़ाने होंगे

ताजनगरी अब हेल्थ इमरजेंसी की ओर बढ़ रही है। तेजी से बढ़ते कोरोना संक्रमण मामलों के बीच जो नई आफत सिर पर खड़ी है, वो ऑक्सीजन, वेंटिलेटर और आईसीयू की है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग जहां इन आवश्यकताओं को पूरी करने की कोशिशों में जुटे हैं, वहीं आम आदमी खौफजदा है। मन में रह-रहकर सवाल उठ रहा है कि अगर कोरोना हो गया तो इलाज मिलेगा या नहीं ?

कोरोना की दूसरी लहर डरा रही है। ताजनगरी में अस्पतालों में बैड खाली न होने पर बढ़ाए जा रहे हैं। हाल ही में एसएन मेडिकल कॉलेज में पलंगों की क्षमता, 220 बेड को बढ़ाकर 320 कर दी गई है और जिला अस्पताल में 18 बैड का 78 किया गया है। एफएच मेडिकल कालेज में 100 बेड को बढ़ाकर 150, रामरघु हॉस्पिटल में 140, प्रभा हॉस्पिटल में 60, रवि हॉस्पिटल में 45, नयति हॉस्पिटल में 60, ब्लॉसम हॉस्पिटल में 45, पारस हॉस्पिटल में 35 किया गया था। इन सारे अस्पतालों के बेड कल रात ही लगभग भर चुके थे। इस सबके बीच कोविड मरीजों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। गुरुवार को भी 295 नए मामले सामने आए हैं। इन हालातों को देखते हुए कोविड हॉस्पिटल और वहां बेड की संख्या बढ़ाने पर विचार जारी है। इधर आईसीयू और वेंटीलेटर की समस्या भी सामने आने लगी है। गंभीर मरीजों के मामलों में सबसे ज्यादा जरूरत इन्हीं दो व्यवस्थाओं की है।

इससे कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज पर संकट मंडराने लगा है। एसएन सहित अन्य अस्पतालों में हर रोज लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट भरवाना पड़ रहा है। जहां स्टोरेज की क्षमता नहीं है वहां सिलेंडर की आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। खपत 10 गुना बढ़ने से कमी होने लगी है। इधर ऑक्सीजन के रेट भी ढाई गुना तक बढ़ गए हैं। सामान्य दिनों में दो से चार टन ऑक्सीजन की खपत हो रही थी। पिछले चार से पांच दिनों में यह बढ़कर 24 टन तक पहुंच गई है।

ढाई से तीन फुट का बी टाइप सिलेंडर 250 से 300 रुपये में जबकि छह फुट का डी टाइप ऑक्सीजन सिलेंडर 450 से 500 रुपये में उपलब्ध हो रहा है। न केवल आगरा बल्कि आस-पास के क्षेत्र भी कोरोना महामारी के कारण प्रभावित हैं। शहर से देहात तक मरीज मिल रहे हैं। पिछली बार ग्रामीण क्षेत्रों से केस नहीं आ रहे थे, लेकिन इस बार ऐसा नहीं है। फिरोजाबाद में गुरुवार को कोरोना के 95 केस मिले हैं जो कि अभी तक का यहां पर सबसे अधिक है। इसके अलावा मथुरा में भी इस समय सौ के करीब रोजाना संक्रमित मिल रहे हैं। एटा और मैनपुरी में भी संक्रमितों का आंकड़ा 50 के करीब है। 100 किलोमीटर दूर ग्वालियर में कोरोना कर्फ्यू लगा हुआ है।

रेमडेसिविर की किल्लत
तेजी
से बढ़ते संक्रमण के बीच आवश्यक दवा रेमडेसिविर की किल्लत भी शुरू हो गई है। गंभीर मरीजों के लिए इस्तेमाल हो रहे इंजेक्शन एसएन मेडिकल कॉलेज में 98 ही बचे हैं। प्राइवेट हॉस्पिटल्स में भी इनकी कमी नजर आ रही है। इंजेक्शन की ब्लैक शुरू हो सकती है। इस बीच सोशल मीडिया पर एक मैसेज तेजी से वायरल होता दिख रहा है। इसमें रेमडेसिविर की जरूरत होने पर सीधे कंपनी के नंबर बताकर प्रसारित किए जा रहे हैं। हालांकि संदेश सही है या गलत इस बारे में अभी नहीं कह सकते।

मास्क और सेनेटाइजर की बिक्री में फिर उछाल
दवा बाजार
की मानें तो मास्क और सेनेटाइजर की बिक्री में एक बार फिर उछाल आया है। साधारण टू और थ्री लेयर मेडिकल मास्क की कीमतें जो 50 पैसे पर आ गए थीं वह मास्क एक बार फिर डेढ़ से दो रुपए में बिक रहा है। वहीं एन-95 मास्क की बिक्री दोबारा बढ़ गई है।

3500 रूपये में तैयार हो रही किट
पल्स ऑक्सीमीटर
बाजार में 500 से 1500 रुपए की कीमत तक बेचा जा रहा है। थर्मामीटर 150 से 300 रुपये तक उपलब्ध है, जबकि थर्मल स्कैनर की कीमतें 1000-1200 से शुरू हैं। नेबोलाइजर 800 से 1000 रूपये की कीमत तक, जबकि ऑक्सीजन कैन 600 रूपये में उपलब्ध है। सर्दी, खांसी, बुखार को मिलाकर एंटीबायोटिक्स, विटामिन सी-डी, आयवरमेक्टिन और कोरोनिल किट में शामिल की जा रही हैं। इस तरह यह पूरी किट लगभग 3500 रूपये में तैयार हो जाती है।

घरों में पहुंचे ऑक्सीजन कैन और स्प्रे
बाजार
में कई तरह के ऑक्सीजन कैन और स्प्रे मौजूद हैं, जिनमें 12 लीटर और 25 लीटर ऑक्सीजन की क्षमता वाले हैं। इनकी कीमत 400 से 600 रुपये के बीच है। इनका वजन 100 से 140 ग्राम तक होता है, जिनमें मास्क इनबिल्ट होता है। आपात स्थिति आने पर इनसे ऑक्सीजन के 200 से 300 पफ लगाए जा सकते हैं। पिछली बार कोरोना बढ़ा तो इनकी डिमांड भी बढ़ गई थी। बीच में कम हो गई और अब फिर केस बढ़ने पर जबरदस्त डिमांग देखी जा रही है।

घर में ही नाप रहे ऑक्सीजन लेवल
पहले
आपको थर्मामीटर घरों में आसानी से मिल जाता था, लेकिन कोरोना संक्रमण ने शरीर में ऑक्सीजन घटाई तो बाजार में पल्स ऑक्सीमीटर की मांग भी बढ़ गई। लोग घर पर ही ऑक्सीमीटर से शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा नाप रहे हैं। डॉक्टरों की मानें तो ऑक्सीमीटर कोरोना मरीजों की मॉनीटरिंग में बहुत अहम होता है। इसकी रीडिंग अगर 95 से 100 प्रतिशत की रेंज में है तो ये सामान्य है। ऑक्सीजन लेवल का गिरना एक खतरनाक संकेत हैं। ऑक्सीजन लेवल 90 प्रतिशत या उससे कम होता है तो अस्पताल में भर्ती होना पड़ सकता है।

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