April 20, 2026
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ऑक्सीजन के छोटे सिलेंडर की भी पैनिक बाइंग!

  • कोरोना के खौफ में एक-एक ग्राहक खरीद रहा दस-दस सिलेंडर
  • प्राइवेट अस्पतालों को भी समय पर नहीं मिल पा रही ऑक्सीजन
  • 350 की ऑक्सीजन रिफिलिंग की कीमत पहुंच गई 800 रुपये

कोरोना के केस बढ़ने के साथ ही प्राइवेट अस्पतालों को मेडिकल ऑक्सीजन की कमी का सामना करना पड़ रहा है। 350 रुपये में भरने वाला मेडिकल गैस के एक सिलेंडर की कीमत 800 रुपये तक पहुंच गई है। प्राइवेट अस्पताल यह भी देने को तैयार हैं, फिर भी ऑक्सीजन समय पर नहीं मिल रही है। बता दें कि कोरोना के इलाज में ऑक्सीजन की प्रमुख भूमिका है। मेडिकल ऑक्सीजन विक्रेताओं का कहना है कि कोविड के फैलने के बाद ऑक्सीजन की सप्लाई में कमी आई है। दूसरे कई धनाद्दय लोगों ने दस-दस छोटे ऑक्सीजन के सिलेंडर खरीद कर अपने घरों में जमा कर लिए हैं। अधिकांश धनी वर्ग के लोग घर पर ही अपना कोविड का इलाज करा रहे हैं।

गौरतलब है कि कोविड संक्रमण होने के बाद सबसे बड़ा खतरा शरीर में ऑक्सीजन लेबल की कमी तथा लंग्स में गंभीर संक्रमण का रहता है। दोनों ही स्थितियों में मरीज को ज्यादा प्रेशर मेंं ऑक्सीजन दी जाती है। इसके लिए चिकित्सक बाईपेप नामक उपकरण का सहारा लेते हैं जो आक्सीजन के दबाव को बढ़ा देता है।  मरीज की स्थित अधिक खराब होने पर वेंटीलेटर की मदद ली जाती है। वेंटीलेटर मशीन के माध्यम से मरीज को सीधे ऑक्सीजन दी जाती है। बड़े सरकारी तथा प्राइवेट अस्पतालों ने तो अपना ऑक्सीजन का प्लांट लगा रखा है। मध्यम तथा छोटे दर्जे के नर्सिंगहोम बाजार से ऑक्सीजन खरीदते हैं।

शहर में मेडीकल ऑक्सीजन के प्रमुख सप्लायर हिमांशु ब्रदर्स के राहुल ने बताया कि ऑक्सीजन सिलेंडर, रेगुलेटर तथा ऑक्सीजन दिए जाने के उपकरणों की पैनिक बाइंग चल रही है। जिस नर्सिंग होम को चार सिलेंडर प्रति दिन की आवश्यकता थी, वह अस्पताल अब 20 सिलेंडर रिफिल करने की मांग कर रहे हैं। जिन लोगों के घरों में कोई गंभीर मरीज है अथवा कोविड के मरीज का इलाज घर पर चल रहा है, वे लोग भी ऑक्सीजन का भंडारण कर रहे हैं। उन्हें भय है कि कहीं लॉकडाउन लग गया या ऑक्सीजन की आपूर्ति की कमी हो गई तो वे क्या करेंगे।

राहुल ने बताया कि आश्चर्य उन्हें तब होता है जब लोग डेढ़ क्यूबिक मीटर वाले छोटे सिलेंडर की मांग करते हैं। एक-एक आदमी दस-दस छोटे सिलेंडर खरीद रहा है। हालांकि एक छोटे सिलेंडर की कीमत छह हजार है किंतु ग्राहक सीधे 60,000 रुपये देकर दस सिलेंडर ले जाता है। पूछने पर पता चलता है कि उनके घर में किसी को कोविड हो गया है। किसी विपरीत परिस्थिति के लिए वे सिलेंडर का इंतजाम करके रख रहे हैं। 15 हजार रुपये की कीमत वाले बड़े ऑक्सीजन सिलेंडर की बिक्री भी कई गुना बढ़ गई है। सभी शहरों में कोरोना फैलने के कारण हर शहर में ऑक्सीजन की मांग बढ़ी है। इस बढ़ी मांग की आपूर्ति ऑक्सीजन निर्माता समय पर नहीं कर पा रहे हैं, इसी कारण ऑक्सीजन की शॉर्टेज हो गई है तथा पहुंचने में देरी हो रही है। बहुत से नर्सिंग होम मेडिकल ऑक्सीजन के बजाया इंडस्टियल प्रयोग में आने वाली ऑक्सीजन का प्रयोग कर रहे हैं।

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