ताजमहल बंदी से प्रभावित होगी शहर की अर्थव्यवस्था
मंदी की मार झेलते झेलते बंदी के कगार पर पहुंच चुके पर्यटन उद्योग पर ताजमहल तथा अन्य संरक्षित स्मारक बंद किए जाने से अस्तित्व का खतरा गहरा गया है। पिछले साल 188 दिन की बंदी के बाद खुले ताजमहल में विदेशी पर्यटकों का आना कोरोना के कारण पहले ही कम था। अब दोबारा 15 मई तक ताजमहल बंद किए जाने से देशी पर्यटक भी शहर में नहीं आएंगे। इसका सीधा असर शहर के पर्यटन तथा होटल रेस्टोरेंट व्यवसाय पर पड़ेगा।
पर्यटन व्यवसायी इस निर्णय को पचा नहीं पा रहे हैं। उनका कहना है कि चुनाव हो सकते हैं, रैलियां हो सकती हैं, देशी-विदेशी फ्लाइट आ जा रही हैं। ऐसे में स्मारक बंद करने से ही क्या कोरोना पर अंकुश लग सकेगा। बता दें कि शहर की एक बड़ी आबादी की अर्थव्यवस्था ताजमहल पर आधारित है। सैकड़ों वेंडर, टैक्सी, रिक्शा वाले, दुकानदार, एंपोरियम, कारीगर, चाय वाले, छोटे, मंझले रेस्टोरेंट व होटल, गाइड तथा फोटोग्राफर सहित अन्य कई प्रकार का व्यवसाय करने वाले लोगों की जीविका का एक मात्र सोर्स ताजमहल पर आने वाले पर्यटक ही हैं।
होटल प पर्यटन उद्योग पर बंदी का खतरा मंडराया
एंपोरियम व्यवसायी व सपा महानगर अध्यक्ष वाजिद निसार का कहना है कि शहर के हजारों लोगों की जीविका ताजमहल के इर्द गिर्द घूमती है। कोविड के कारण पिछले साल सैकड़ों लोग इस इंडस्ट्री के बेरोजगार हो गए। अब दोबारा 207 दिन बाद ताजमहल बंद किए जाने से कारीगर, वेंडर, ऑटो रिक्शा तथारिक्शा चालक तथा होटल व्यवसायियों को बहुत बड़ा नुकसान होगा। सबकुछ देश में पूर्ववत चल रहा है। फ्लाइट आ-जा रही हैं। ट्रेन चल रही है, बाजार खुले हैं। विधानसभा तथा पंचायत चुनाव हो रहे हैं। सरकार का यह निर्णय होटल व पर्यटन इंडस्ट्री की कमर तोड़ देगा। सरकार अपने निर्णय पर पुर्नविचार करे।










